मंदिर है वो मधुशाला- साकेत

उन्हें मालूम था हम जाएंगे न यूं
रहकर मंजिल से अंजाना
पूछेंगे भले न फलसफा मगर
पूछेंगे हम कि कहां है जाना
उन्हें मालूम था रास आएगा न मुझे
वह खुश्तलबों का जमाना
इसलिए मंदिर बताकर ले गए थे वे मुझे
पहली दफा मयखाना

हमें रास आ गया फिर
वहां महफ़िल का सजना महफ़िल को सजाना
ख़ामोश पड़ी रूह का
खुशियों से चिल्लाना
आंसुओं को भांप बना उड़ा फेंकना
चेहरे पर खुशियों का कवर चढ़ाना
मंदिर ही है अब वो मेरा
जो था कल तक मेरे लिए मैखाना

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